Tuesday, June 10, 2014

स्वयं से पूछो 'तुमने कितने घंटे साधना करने में लगाये? B.a ,M.a,M.ed करने में तो 10 गुणा समय दिया-पेट के लिए। ईश्वरीय काम के लिए कितने घंटे दिये?' और चाहते हो पूरा लाभ मिल जाये। कोई नगर तुम्हारे घर से 100 मील दूर है, तो दस मील चलने के बाद तुम खड़े क्यों हो गए? अरे और आगे चलो, नगर मिलेगा। रोड ठीक है, माइलस्टोन भी मिल रहें हैं। लेकिन अगर आपको रोड़ पर डाउट हो गया ,तो 10 मील जाकर लौट आए। फिर 10 मील दक्षिण चले, फिर 10 मील उत्तर चले, फिर पश्चिम चले, इस प्रकार जीवन भर चलते जाओ, तो कभी भी लक्ष्य तक नहीं पहुचोंगे।
25 foot गड्ढा खोदा।निराश हो गया,"अजी यहाँ पानी नहीं है", और जगह खोदो। वहाँ भी 20 foot खोदा। यहाँ भी नहीं है। इस प्रकार करोड़ों foot खोदते जाओ। पानी नहीं निकलेगा। यदि लगातार एक जगह 50 foot और खोद डालते तो पानी निकल आया होता। अगर वास्तविक महापुरुष मिल जाये, तो कुछ भी असम्भव नहीं। अनन्त नगण्य जीव महापुरुष बने हैं। तुम क्यों नहीं बन सकते?

--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

अपने साधकों के साथ इतना प्रयास, साधना में दिन रात अथक परिश्रम एवं प्रयत्न करने वाला दूसरा गुरु विश्व में नहीं मिलेगा।

भक्त के लिये भगवान का प्राण समर्पित है।
GOD IS READY TO DO ANYTHING AND EVERYTHING FOR A TRULY SURRENDERED DEVOTEE.

मैं आप लोगो से फिर से निवेदन करता हूँ,आज्ञा देता हूँ कि खाली समय का सदुपयोग करें,काम में ले,कुछ कमा ले,'राधे' नाम का जाप करें। मेरी बात पर विश्वास करके अगर दस दिन कर लिया तो आदत पड़ जायेगी,फिर 'राधे' जाप के बिना रहा नहीं जायेगा। कुछ दिन जबरदस्ती किसी चीज का अभ्यास कर लो,फिर आदत पड़ जाती है,अपना खाली समय काम में लो।
...........श्री महाराज जी।

"भगवान की सेवा से भगवान की कृपा मिलेगी, उनका प्यार मिलेगा, अंत:करण शुद्ध होगा और वो तुम्हारा योगक्षेम वहन करेंगे।
------श्री महाराज जी।"

Monday, June 9, 2014

तुझे पाने की आरज़ू और तुझसे मिलने की जुस्तज़ू ............!
जिन्दगी इन दो ख्वाबों से शुरू और इन दो अरमानों पर खत्म............!!
राधे-राधे।

राधे-राधे बोल नित,करु राधे को ध्यान।
ऐहैं निज गोलोक तजि,भाजत श्याम सुजान।।

निरंतर श्री राधिका का ध्यान करते हुए उनका नामादि संकीर्तन करो। इसी साधना से श्यामसुंदर बिना बुलाये भागे भागे अपना लोक छोड़कर आ जायेंगे। राधे नाम से श्यामसुंदर को इतना अनुराग है।
Constantly meditate on Shri Radha while chanting her name and glories.With this very spiritual practice,Lord Krishna will come running to you leaving his divine abode Goloka.Shyamsundar loves the name of Radha so much.
'भक्ति शतक' दोहा संख्या ८०.........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...