Saturday, June 14, 2014

मान ले उनको तू सिर्फ़ अपना.......सीख़ ले याद में बस तड़पना.........वे लगा लेंगे सीने से तुझको.......वे लगा लेंगे सीने से तुझको.........वे 'कृपालु' हैं तंगदिल नहीं हैं...........!!

जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रचारिका सुश्री श्रीधरी दीदी द्वारा विलक्षण दार्शनिक प्रवचन एवं रसमय संकीर्तन का आयोजन। सभी भक्तगण सादर आमंत्रित हैं।
दिनाँक:-15 जून से 25 जून,2014।
समय:- साँय 6 से 7.30 बजे तक।
स्थान: सत्संग भवन,गणेश मंदिर,झोटवाड़ा,जयपुर।

Friday, June 13, 2014

'आज' नहीं 'कल' कर लेंगे,बस वो कर ले,बस ये कर लें,बस फिर भजन करेंगे.......इस प्रकार अनंत जन्म गँवा दिये लेकिन वह 'आज' और वो 'कल' कभी ना आ सका।
.........श्री महाराजजी।
Your tatvagyan (concepts of the Divine Path) should be so strong so that even if a person presents his head(is ready to give away his life) to you then also you should have a firm faith on your spiritual masters words that no one in this world can love another person and its only Guru and Bhagwan who love you unconditionally .Then only you can move on this path which leads you to the attainment of your ultimate goal i.e. Divine Love without any distractions.
-------SHRI MAHARAJ JI.

मानव देह की दुर्लभता के साथ साथ क्षणभंगुरता पर विचार करते हुए तुरंत वास्तविक महापुरुष द्वारा निर्दिष्ट साधना प्रारम्भ करो, संसारी कमाई पर नहीं, ईश्वरीय कमाई पर ध्यान दो। वो ही साथ जायेगी।
.......जगद्गुरु श्री कृपालु महाप्रभु।

अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर...........
जब हम परमात्मा से प्रेम करने लगते हैं तो कोई भी सांसारिक वस्तु इस लायक नहीं प्रतीत होती कि उससे प्रेम किया जाए। जिस प्रकार चातक को यह विश्वास होता है कि स्वाति नक्षत्र में बरसे जल से ही उसकी पिपासा शान्त होगी, तब चातक पक्षी पावस में गिरने वाली ओस की पहली बूंदों का प्यासा हो जाता है तो उसे न तो तूफान का भय होता है और न ही बादलों की गर्जना का। इसी प्रकार साधक को भी ऎसी प्यास उत्पन्न हो जाये तो परमात्मा की प्राप्ति सुलभ हो जाती है, यदि एक बार ईश्वर सानिध्य का स्वाद चख लिया तो फिर उसे संसार की सभी वस्तुयें स्वत: ही बेजान और बेस्वाद लगने लगती हैं। तब सांसारिक सुख-दुख की धारणा मिट जाती है, तब वह परम-आनन्द को प्राप्त कर सभी प्रकार से मुक्त हो जाता हैं।
जय श्री राधे।

Thursday, June 12, 2014

भगवद क्षेत्र में उधार मत करो। तुरंत साधना में लग जाओ। मृत्यु किसी भी क्षण आ सकती है। और जब आज कल पर ही टालते रहोगे तो उम्र चाहे जितनी भी हो पर कभी भजन प्रारंभ नहीं कर सकोगे। अत: भगवदप्राप्ति का लक्ष्य पूरा नहीं होगा।
-------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...