Wednesday, July 23, 2014

जानने मात्र ते ना बने कछु कामा।
जानो पुनि मानो पुनि जाहु शरण श्यामा।।

janne matr te na bane kachu kama.
jano puni mano puni jahu sharan shyama.

Theoritical knowledge of the scriptures is of no use until it leads you to complete faith and complete surrender to Shri Shyama.
Shyama Shyam Geet - 72
-Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj.
Radha Govind Samiti.

गुरु वन्दना........!!!!!
वेदों शास्त्रों, पुराणों, गीता,भागवत ,रामायण तथा अन्यानय धर्मग्रन्थों के शाश्वत अलौकिक ज्ञान के संवाहक तुमको कोटि-कोटि प्रणाम। जन-जन तक यह ज्ञान पहुँचाकर दैहिक ,दैविक,भौतिक तापों से तप्त कलियुगी जीवों के लिए तुमने महान उपकार किया है जो सरलतम,सरस,सार्वत्रिक ,सार्वभौमिक,भक्तियोग प्राधान्य मार्ग तुमने प्रतिपादित किया है,वह विश्व शांति का सर्व-सुगम साधन है,असीम शाश्वत आनंद का मार्ग है। सभी धर्मानुयायीयों को मान्य है।
हे जगद्गुरूत्तम! तुमको कोटि-कोटि प्रणाम। कोटि-कोटि प्रणाम।

हे जगद्गुरूत्तम! भगवती नन्दन!
तुम्हारी महिमा का गुणगान सहस्त्रों मुखों से भी असंभव है। तुम्हारी वंदना में क्या लिखें कोई भी लौकिक शब्द तुम्हारी स्तुति के योग्य नहीं है।
बस तुम्हारा 'भक्तियोग तत्त्वदर्शन ' युगों-युगों तक जीवों का मार्गदर्शन करता रहेगा।
तुम्हारे श्री चरणों में यही प्रार्थना है कि जो ज्ञान तुमने प्रदान किया उसको हम संजोये रहे और तुम्हारे द्वारा बताये गये आध्यात्मिक ख़जाने की रक्षा करते हुएतुम्हारे बताए हुए मार्ग पर चल सकें।
धर्म,संस्कृति ,ज्ञान,भक्ति के जीवंत स्वरूप हे जगद्गुरूत्तम ! तुमको कोटि-कोटि प्रणाम। कोटि-कोटि प्रणाम।

तुमने समझा ही नहीं और ना ही समझना चाहा.....!
कि हमने चाहा ही क्या तुम्हारे सिवा......!!
राधे-राधे।

सबसे बड़ा पाप है दूसरे को दुःख देना।
....श्री महाराज जी।

We should always feel God's presence with us every moment.
यह न भूलें कि भगवान् प्रतिक्षण हमारे साथ हैं।
----SHRI MAHARAJ JI.

जो समझा दे श्रुति सार, उर भरा प्रेम रिझवार।
सोई है सद्गुरु सरकार, गुरु सोई 'कृपालु' सरकार।।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...