Saturday, August 2, 2014

क्यों रहिहैं ब्रज ब्रजनार रे |
करत लँगरई दिन प्रति दूनी, नटखट नंदकुमार रे |
घूँघट के पट टारि कहत टुक, हमरिहुँ ओर निहार रे |
जो बरजहु तो कर बरजोरी, चुनरिहुँ शीश उतार रे |
लै लकुटिहिं मटुकीहूँ फोरत, तोरत गर लर हार रे |
सब ‘कृपालु’ ब्रज नारि हारि गईं, कछु न याय उपचार रे ||

भावार्थ – एक सखी कहती है कि अब इस ब्रज में ब्रजांगनाओं का रहना असम्भव है, क्योंकि यहाँ पर नटखट श्यामसुन्दर का ऊधम दिन – प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है | वे गोपियों के घूँघट को खोलकर उनसे कहते हैं कि तनिक हमारी ओर भी तो देखो | अगर उन्हें घूँघट खोलने से कोई रोकती है तो बरबस सिर से चुनरी भी उतार देते हैं | साथ ही हाथ में लठिया लेकर पीछे से मटुकी फोड़ देते हैं | जब वह मुड़कर देखने लगती है तो उसके गले के हार भी तोड़ देते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ के कथनानुसार समस्त ब्रजांगनाएँ सब प्रकार से हार चुकी हैं | अब कोई भी उपाय शेष नहीं है |
( प्रेम रस मदिरा श्री कृष्ण – बाल लीला - माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति

स्थिति जो है-स्वयं के सुख के लिए प्लानिंग-प्रैक्टिस करना।
स्थिति जो होनी चाहिए-हरि-गुरु के सुख के लिए प्लानिंग-प्रैक्टिस करना।

Friday, August 1, 2014

हरियाली तीज की आप सभी प्रिय मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएँ
राधे - राधे।

आज हरियाली तीज है, गोविन्द राधे !
तन मन धन तीनों हरि पै लुटा दे !!

हरियाली तीज पर हे गोविन्द राधे !
जित देखू हरी हरि ही दिखा दे !!

हरियाली तीज पर हे गोविन्द राधे!
हरि बोलू, हरि देखू , हरि ही सुना दे !!

हरियाली तीज पर हे गोविन्द राधे!
हरि मिलन की कामना उर में बढ़ा दे !!

हरियाली तीज पर हे गोविन्द राधे!
उर बिच झूला डार झूला झुला दे !!

हरि देखूँ हरि सुनूँ , गोविन्द राधे !
हरि गाऊँ हरि पाऊं , हरि ही सुंघा दे !!

हरिहूँ की हरितायी गोविन्द राधे !
हिय हर्षित करि हरिहूँ बना दे !!

आली हरियाली तीज- गोबिंद राधे !
चलो "लाली-लाल" को झूला झूला दें !!

आली हरियाली तीज-गोबिंद राधे!
चलो "लाली-लाल" हाथ मेहँदी रचा दें !!

आली हरियाली तीज- गोबिंद राधे!
चलो "लाली-लाल"को मल्हार सुना दें !!

सर्व पर्व लक्ष्य एक , गोविन्द राधे !
जग से हटा के मन, हरि में लगा दे !!

....... श्री महाराज जी।

कदम्ब की डारी झूलें राधा प्यारी , झूलें राधा प्यारी झुलावें बनवारी !
गावें ब्रजनारी दै दै कर तारी , कुंजबिहारी बोलें बलिहारी !
हौंहू वारी वारी झाँकी लखि न्यारी , बनि ब्रजनारी नाचें मदनारी !
कबहुँ मुरारी झोंटा देंय भारी , अति सुकुमारी डरपति प्यारी !

Happy Hariyali Teej to all of you !!
RADHEY-RADHEY.

If your Guru had not given you spiritual knowledge, if he had not bestowed his love upon you, how would you be inclined to do good things in this life? So do not ever give credit to yourself, as this will only give rise to ego and egotism takes away humility. Once humility is gone, the castle of bhakti will come crashing down. So if you have done some noble deeds, YOU MUST BE THANKFUL TO THE GURU, with whose grace alone you are able to do such things; this will save you from egotism.
----JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
One should not forget God in times of happiness and should realise His grace even in times of misery.
सुख का अनुभव करते समय भी भगवान् को मत भूलो तथा दुःखकाल में भी उनकी कृपा का अनुभव करो।
-------SHRI MAHARAJ JI.

गुरु की सेवा करने वाला साधक तो गुरु का प्रिय है,अत: उससे द्वेष करना पाप है।
.......श्री महाराज जी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...