Friday, August 1, 2014

गुरु की सेवा करने वाला साधक तो गुरु का प्रिय है,अत: उससे द्वेष करना पाप है।
.......श्री महाराज जी।

No comments:

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...