Friday, August 8, 2014

अकिंचन बन कर ; शुद्ध , सरल , निष्कपट भाव से जब साधक पुकारता है , तब वह अकारण - करुण भगवान् अपनी कृपा से उसे किसी महापुरुष से मिला देते हैं !
------------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु.

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

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