Monday, August 4, 2014

बचपन में ही भक्ति में लग जाओ तो युवा अवस्था का नशा हावी नहीं होगा,फ़िर संस्कार बन जायेंगे तो भगवान की और युवा अवस्था में भी चलोगे।
.........श्री महाराजजी।


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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...