Monday, September 15, 2014

जरा सोचिए:
संसार मे सर्वत्र यही देखा जाता है, कि जिससे भी हमारा स्वार्थ हो हम उसे रिझाने के लिए अनेकानेक झूठे सच्चे स्वांग रचते रहते हैं । इस पर भी वह हमारे हित साधेगा ही यह जरुरी नही है ।और यह तो अंसभव ही है ,कि कोई अपने अहित की कीमत पर हमारा स्वार्थ साधे ।
और दूसरी तरफ जिसका अपना कोई स्वार्थ ही ना हो, जिसे देने के लिए हमारे पास कोई समान ही ना हो ,जिसे प्रसन्न करने के लिए हम कभी सच्चा प्रयास भी ना करते हो , वह व्यक्तित्व केवल हमारा हित साधने के लिए अनवरत , अथक व अकथ प्रयास करता रहे, वह भी हमे बिना बताये । हमारे न समझने पर दूसरी बार दूसरी तरह से फिर तीसरी तरह से फिर . . . . . . लगातार बिना निराश हुये हमारे मानसिक स्तर पर उतरकर कष्ट, पीडा व बदनामी को सहन करते हुए , हमारे परम चरम हित के लिए लगा रहे । विडम्बना ये कि हम उसे प्रसन्न करने का प्रयास कर उसके पावन चरणारविन्दो पर अपना सर्व-समर्पण कर अपने आप को लुटा देना तो दूर , उसके उपकारो को रियलआइज़(realize) भी ना करेँ . . . . . !!
हे र्दुदैव! हम और हमारे कृत्घनी मन को धिक्कार है ।
हे करुणामयी अम्मा! इससे पहले कि अधिक देर मे अंधेर हो जाये ,हमारी कुटिल कुचाली विपरीत बुद्धि को ठीक कर दो !
हमे सद्बुद्धि की भीख दे दो माँ ,चरण कमल बलिहार............. !!

कृपा करु बरसाने वारी,तेरी कृपा का भरोसा भारी।
कोउ हो या न हो अधिकारी, सब पर कृपा करें प्यारी।।
------श्री कृपालु जी महाप्रभु।

Sunday, September 14, 2014

The sweetness of the Radha name is so much that the ruler of the entire universe becomes a slave to Radha Rani due to that.

"हमारे श्री महाराजजी की वाणी सनातन वेद वाणी है। उनके श्रीमुख से नि:सृत एक-एक शब्द, उपदेश साक्षात भगवान श्री कृष्ण के ही उपदेश हैं। हमें उन्हे विश्वास एवं श्रद्धा से हृदयंगम करना चाहिये।"

"भक्तियोग-रस-अवतार अभिराम,करें निगमागम समनव्य ललाम।
श्यामा-श्याम नाम,रूप,लीला,गुण,धाम, बांटि रहे प्रेम निष्काम बिनु दाम।"

Saturday, September 13, 2014

"BHAKTI" :
It is described as an unconditional dedication of heart,body,and mind to please RadhaKrishn.it is an experience of devotional affinity,not just the fulfillment of religious rituals.it is a joy of desired servitude to the divine beloved,not the observance of a prescribed formality.it is a pure expression of natural,selfless love,not a prayer demanding the fulfillment of material needs.'Bhakti' is a loving affinity that grows on the base of humbleness,dedication and devotional emotions that are enlivened by remembering the name,virtues and leelas of RadhaKrishn."
.....JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

कृपा करु बरसाने वारी,तेरी कृपा का भरोसा भारी।
कोउ हो या न हो अधिकारी, सब पर कृपा करें प्यारी।।
------श्री कृपालु जी महाप्रभु।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...