Saturday, June 6, 2015

हम पतितों की प्राण हैं राधे, जीवनधन अरमान हैं राधे।
स्वामिनी कर दो दया की दृष्टि, दिन रात हम तुमहें ही आराधे ।।
अगर कोई सोचता है- मैं अभागा हूँ। यह भगवान अथवा गुरु के प्रति सबसे बड़ी अकृतज्ञता है। कोई समर्थ गुरु मिल गया तो। भगवान की कृपा की तो यह अंतिम सीमा हो गयी।
------श्री महाराजजी।
सारा खेल मन के चिन्तन और बुद्धि के डिसीजन (decision) पर है। मनुष्य जो चाहे बन सकता है- देव, दानव, या महापुरुष।
.......जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
True surrender is to join your mind with the Divine Spiritual Master by obeying his instructions without any questions or hesitation.
-----SHRI MAHARAJJI.

SATSANG AND KEERTAN BY SHREEDHARI DIDI(PREACHER OF
JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ):

ADDRESS OF SATSANG CENTRE AT JAIPUR:
SATSANG BHAWAN(PARWAL HALL) ,NEAR MAHESH PARK,MAHESH COLONY,J.P.UNDERPASS....TONK FATAK,JAIPUR.

EVERY SUNDAY: 10A.M. TO 12 P.M.
CONTACT:9928425799.

ये मन बहुत चंचल है लेकिन अभ्यास और वैराग्य से मन पर कंट्रोल अनन्त जीवों ने किया है कर रहे हैं करेंगे।
-----जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
भक्ति का मुख्य फल गोविंद राधे ।
दिव्य प्रेम युक्त कृष्ण सेवा बता दे ।।


राधा गोविंद गीत।
------- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज ।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...