Monday, September 28, 2015

इसी संसारी कामना ने हमारा अनंत जन्म बिगाड़ा,छोड़ो इसको,नहीं मांगना है, दुःख मिले भोग लो, भगवान से नहीं कहना है,किसी देवी देवता से नहीं कहना है,केवल राधा कृष्ण की उपासना करो नंबर एक,मोक्ष तक की कामना न करो नंबर दो,रोकर पुकारो नंबर तीन और हर जगह हमेशा ये realize करो वो हमारे हृदय में हैं।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

Monday, September 14, 2015

सुधार अपने अंदर साधक को स्वयं करना है और भूलकर भी ये न सोचो कि भविष्य में कोई दिव्य शक्ति साधना करेगी। दिव्य शक्ति को जो कुछ करना है वह स्वयं करती है। उसके किए हुए अनुग्रह को भगवदप्राप्ति के पूर्व कोई समझ नहीं सकता। यही गंदी आदत यदि तुरंत नहीं छोड़ी तो नासूर बनकर विकर्मी बना देगी और फिर उच्छृंखल होकर कहोगे सब कुछ उन्ही को करना है। इसलिए तुरंत निश्चय बदलो।
-------श्री महाराजजी।
an
भगवान् योग माया के पर्दे में रहते हैं और जीव माया के पर्दे में , अतः भगवान् के साकार रूप में सामने खड़े होने पर हम उन्हें अपनी भावना के अनुसार ही देख पाते हैं !
*****जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज*****
Your rise and fall on the Spiritual Path depends entirely on your thoughts,reflections and prevailing attitude.Therefore,always keep your mind occupied with the loving thoughts of God and Guru.Avoid kusanga or Non-Godly association at all costs,Do not talk with or listen to the wrong sorts of people.If you hear anything other than God and Guru,disregard it immediately.
------JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

एक वाक्य रट लीजिये कि रोम-रोम से कि श्यामसुंदर के सुख के लिये ही श्यामसुंदर का दर्शन चाहेंगे,सेवा चाहेंगे,सब चीज उनकी इच्छा के अनुसार,उनकी इच्छा के विपरीत कदापि नहीं।
........श्री महाराज जी।
संसार से वैराग्य इसलिये नहीं है की हमे तत्वज्ञान नहीं है, अत: तत्वज्ञान के सिद्धान्त को सदा ही रीवाईज़(revise) करते रहना चाहिए ।
-------श्री महाराजजी।

Thursday, August 13, 2015

जो साधना,साधक को साध्य से मिला दे वही वास्तविक साधना है।
......श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...