Saturday, December 19, 2015

श्री कृष्ण का माधुर्य रस इतना विलक्षण है कि श्रीकृष्ण स्वंय अपने आप को देखकर मुग्ध हो जाते हैं एवं अपना ही आलिंगन करना चाहते हैं । अतः वे निजजन के ही मनमोहन नहीं हैं , वरन अपने मन के भी मोहन हैं ।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

The stronger your decision that God alone is mine, the more intense will be your desire to meet Him. The more intense your desire, the deeper will be your resolve to do the things that take you closer to Him. The deeper your resolve, the harder you will try. The harder you try, the more grace you will attract and the closer you will come to Him.
.....SHRI MAHARAJJI.

भक्ति रूपी महल दीनता पर ही खड़ा है। जिसे विशेष लाभ प्राप्त करना है उसे दीनता लानी होगी।
-------श्री महाराजजी।

जितनी देर जिस गहराई से मन भगवदीय उपासना में तल्लीन रहेगा , वही भगवदीय उपासना नोट होगी। बाकि सब की सब माया की उपासना में नोट की जायेगी।
.......श्री महाराजजी।

Sunday, December 13, 2015

जग तो है माया का बना , इक हरि ही अपना !
The world is made of maya; only God belongs to you.
----SHRI MAHARAJ JI.
संत एवं श्यामा श्याम हमारे हो चुके -ऐसा विश्वास बार बार दृढ़ करो और हम भी संत एवं श्यामा श्याम के हो चुके -ऐसा निश्चय बार बार करो !
~~~~जगदगुरु श्री कृपालु जी महाराज~~~~~

जिन्होंने श्री श्यामा - श्याम एवं श्री सीता - राम में अभेद बताया है , इस सिद्धांत को परिपक्व करने के लिए अपने जन्म स्थान स्थित ' भक्ति मंदिर ' एवं श्री धाम वृन्दावन स्थित ' प्रेम मंदिर ' में श्री यादवेन्द्र सरकार और श्री राघवेन्द्र सरकार दोनों के ही श्री विग्रह स्थापित किये हैं ,
ऐसे अनुपम प्रेम के सिद्धान्त को प्रकट करने वाले श्री प्रिया प्रियतम के प्रेम रस रसिक गुरुवर को कोटि कोटि प्रणाम !

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...