Sunday, January 3, 2016

भगवन्नाम में भगवान् की समस्त शक्तियाँ विधमान हैं ...........नाम स्वयं में पूर्ण है।
किसी अन्य व्यक्ति से दीक्षा लेने की आवश्यकता नहीं है।

-----जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज के अनुसार समस्त वेदों शास्त्रों का सार 'राधा' नाम ही है। श्री राधाकृष्ण नाम, रूप, लीला, गुण, धाम का निरंतर गुणगान ही उनकी प्रमुख शिक्षा है जो वे सभी साधकों को बताते हैं।

हजारों जन्म के निरन्तर साधना के बाद तो यह अवस्था आती है जो आप लोगों को आज मिली है।
हजारों मील से यहां आये है , जमीन पर सोते हैं और इतना परिश्रम करते हैं।
यह सौभाग्य हजारों जन्मों के प्रयत्न के बाद मिलता है।
लेकिन आप साधारणरूप से यही समझते होंगे कि दो साल पहले {महाराजजी} मिले होते और उनका लैक्चर { LECTURE } सुना और उसके बाद ये सौभाग्य मिल गया।
यह ठीक है की { महाराजजी } के कारण गाड़ी आगे चली , लेकिन यह बर्तन तो आपके संस्कारों का ही बना हुआ था जिसमें { महाराजजी } के विषय में अधिकार मिला।

………जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
मानव देह मिला, वास्तविक गुरु मिले, संसार से प्रथक हो गये, हरि-गुरु सेवा भी मिली, इतनी कृपा तो करोड़ों जीवों में से किसी एक को भी नहीं मिलती। अत: क्षण-क्षण सावधान रहो।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
Your mind itself is the obstacle between you and God,and your mind itself is the medium of finding God.

........SHREEDHARI DIDI(PREACHER OF JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ).

Saturday, December 19, 2015

God is available only to those who sacrifice some of their time and make the effort to know Him. Lord Krishna is so merciful that He promises to run sixty steps to meet the devotee who takes just one step towards Him. But you have to take that first step yourself. No one can take it on your behalf, nor can you pay another to take it for you.

......SHRI MAHARAJJI.

श्री कृष्ण का माधुर्य रस इतना विलक्षण है कि श्रीकृष्ण स्वंय अपने आप को देखकर मुग्ध हो जाते हैं एवं अपना ही आलिंगन करना चाहते हैं । अतः वे निजजन के ही मनमोहन नहीं हैं , वरन अपने मन के भी मोहन हैं ।
-------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...