This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Sunday, January 3, 2016
हजारों जन्म के निरन्तर साधना के बाद तो यह अवस्था आती है जो आप लोगों को आज मिली है।
हजारों मील से यहां आये है , जमीन पर सोते हैं और इतना परिश्रम करते हैं।
यह सौभाग्य हजारों जन्मों के प्रयत्न के बाद मिलता है।
लेकिन आप साधारणरूप से यही समझते होंगे कि दो साल पहले {महाराजजी} मिले होते और उनका लैक्चर { LECTURE } सुना और उसके बाद ये सौभाग्य मिल गया।
यह ठीक है की { महाराजजी } के कारण गाड़ी आगे चली , लेकिन यह बर्तन तो आपके संस्कारों का ही बना हुआ था जिसमें { महाराजजी } के विषय में अधिकार मिला।
हजारों मील से यहां आये है , जमीन पर सोते हैं और इतना परिश्रम करते हैं।
यह सौभाग्य हजारों जन्मों के प्रयत्न के बाद मिलता है।
लेकिन आप साधारणरूप से यही समझते होंगे कि दो साल पहले {महाराजजी} मिले होते और उनका लैक्चर { LECTURE } सुना और उसके बाद ये सौभाग्य मिल गया।
यह ठीक है की { महाराजजी } के कारण गाड़ी आगे चली , लेकिन यह बर्तन तो आपके संस्कारों का ही बना हुआ था जिसमें { महाराजजी } के विषय में अधिकार मिला।
………जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।
Saturday, December 19, 2015
God
is available only to those who sacrifice some of their time and make
the effort to know Him. Lord Krishna is so merciful that He promises to
run sixty steps to meet the devotee who takes just one step towards Him.
But you have to take that first step yourself. No one can take it on
your behalf, nor can you pay another to take it for you.
......SHRI MAHARAJJI.
......SHRI MAHARAJJI.
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