Wednesday, May 4, 2016

सोचो! अगला क्षण मिले न मिले.........!!!

....श्री महाराजजी।

भगवान तुमकों नहीं भूलते। वो तुम्हारे हृदय में बैठे हैं, सदा सर्वत्र। वो तुम्हारा साथ नहीं छोड़ते कभी भी। तुम ही भूले हुए हो अपने वास्तविक संबंधी को। भगवान कहते हैं:- बस मेरा स्मरण करो, और कुछ न करो। मैं सबकुछ करूँगा तुम्हारा। तुम खाली स्मरण करो, बाकी सब काम मैं करूँगा, और सदा के लिए अपना बना लूँगा।

------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

When you do selfless service to God not expecting anything in return, the irony is that God gives you the best even without asking for it.

......SHRI MAHARAJJI.
अपने को दीन, पतित, अधम मानो वरना जीवन भर की कमाई खो जायेगी।

------श्री महाराजजी।

Why do you get disheartened and sad? Don’t you believe that God is with you at all times and protecting you? Don’t you have faith in God’s promise that He has to love you in the same way, same manner and same extent as you love Him? He has also said “Jo Tu Dhyave Ek Pag, To Mein Dhyavu Saath”. If you take one step towards me then I will run 60 steps towards you. Why do you look for shelter in the world?
सद्गुरु की शरणागति में रह कर जो जीव श्यामा श्याम की भक्ति करते हैं , उनका अंतःकरण शुद्ध हो जाता है।

सद्गुरु के पास किसी को इंकार नहीं है। जो डूबने को राजी है सद्गुरु उसे लेने को तैयार है। वह शर्ते नहीं रखता। वह पात्रताओं के जाल खडे नहीं करता। अपात्र को पात्र बना ले, वही तो सद्गुरु है। अयोग्य को योग्य बना ले वही तो सद्गुरु है। संसारी को सन्यासी बना ले, वही तो सद्गुरु है।
 

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...