Wednesday, May 4, 2016

सुमिरन कर ले मना, राधा अरु राधारमना ।
दोई गोपीजन जीवना, राधा अरु राधारमना।।

---- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

एक कल गया,एक आज जा रहा है और एक उसको लेकर जा रहा है शमशान घाट तक, राम नाम सत्य है और फिर भूल गया लौटते समय कि संसार सत्य है और प्लानिंग कर रहा है करोड़पति बनने की ये सबसे बड़ा आश्चर्य है कि बचे हुए लोग अपने लिये नहीं सोचते कि हम भी किसी भी क्षण जा सकते हैं। अपराध से बचें,हरि-गुरु का चिंतन करें। लापरवाही छोड़े।

राम नाम सब सत्य कह,जब लौं जात मसान।
लौटत ही पुनि जगत केंह,सत्य मान धनि ज्ञान।।


--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

कोई आपका दुश्मन भी आ रहा है, रिवाल्वर लेकर ! सोचो - मैं आत्मा हूँ, यह मेरा क्या बिगाड लेगा। शरीर से अलग होने पर प्रियतम के पास पहुंच जाऊँगा। डरो मत ! सोचो कि यह सब प्रभु की लीला हो रही है। परीक्षा के लिए प्रतिक्षण तैयार रहो।

सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
सोचो! अगला क्षण मिले न मिले.........!!!

....श्री महाराजजी।

भगवान तुमकों नहीं भूलते। वो तुम्हारे हृदय में बैठे हैं, सदा सर्वत्र। वो तुम्हारा साथ नहीं छोड़ते कभी भी। तुम ही भूले हुए हो अपने वास्तविक संबंधी को। भगवान कहते हैं:- बस मेरा स्मरण करो, और कुछ न करो। मैं सबकुछ करूँगा तुम्हारा। तुम खाली स्मरण करो, बाकी सब काम मैं करूँगा, और सदा के लिए अपना बना लूँगा।

------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।

When you do selfless service to God not expecting anything in return, the irony is that God gives you the best even without asking for it.

......SHRI MAHARAJJI.
अपने को दीन, पतित, अधम मानो वरना जीवन भर की कमाई खो जायेगी।

------श्री महाराजजी।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...