Saturday, June 18, 2016

बलिहार युगल सरकार, हमरिहुँ ओर निहार।
तुम मात पिता भरतार, हम सेवक सदा तिहार।
तुम पतितन को रखवार, हम पतितन को सरदार।
तुम दीनबंधु सरकार, हम अहंकार अवतार।।

----- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

One should not forget God in times of happiness and should realise His grace even in times of misery.

सुख का अनुभव करते समय भी भगवान् को मत भूलो तथा दुःखकाल में भी उनकी कृपा का अनुभव करो।

........सुश्री श्रीधरी दीदी (जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की प्रचारिका)।
Do not procrastinate in the matter of spiritual practise as the human body is transient.

मानव देह क्षणभंगुर है अतः उधार न करो।


----SHRI MAHARAJ JI.

Tuesday, June 7, 2016

जो सदा मुझसे युक्त हैं, और प्रेमपूर्वक मेरी आराधना करते हैं, उन्हें मैं वह मेधा (बुद्धियोग) प्रदान करता हूँ, जिसके द्वारा वे मुझे पूर्ण रूप से प्राप्त करते हैं।

—भगवान् श्रीकृष्ण।
जय जय राम,जय जय राम,जय जय राम,जय जय राम।
आओ भरत शत्रुघन लछिमन राम,लाओ जनकनंदिनीहुँ सँग महँ राम।
जिओ जुग जुग चारिहुँ भइयन राम, जय जय जुग जुग जिये जोरी सीता राम।

------- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
हरि गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हो और निष्काम हो। उनकी इच्छा में इच्छा रखना ,उनको सुख देना, तन मन धन से सेवा करना,अपना सर्वस्व मानना,निरंतर मानना,यही प्रेम है,शरणागति है। जिसने ये शर्तें पूरी कर दीं वो कृतार्थ हो गया। जिसने नहीं पूरी कीं वो चौरासी लाख योनियों में जैसे कोल्हू का बैल होता है ऐसे घूम रहा है बेचारा ।

..........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाप्रभु।
शास्त्रीय सिद्धांतों को प्रवचन, साहित्य, टी. वी. के माध्यम से एवं प्रचारकों को शिक्षित करके देश-विदेश में भेजकर उनके द्वारा जनसाधारण तक पहुँचाकर, सम्पूर्ण विश्व का महान् उपकार करने वाले करुणावतार श्री कृपालु गुरुदेव के कोमल चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम...!!!

ब्रजधाम के एक साधु श्री का श्री महाराजजी के लिए उदगार...!!!
"कृपालु जी महाराज तो साक्षात् राधारानी हैं, वे तो अवढरदानी हैं। उन जैसा अवढरदानी, महान् दाता पृथ्वी पर दूसरा कोई नहीं हो सकता। उन्होंने तो सदा से लुटाया ही लुटाया है, लूटने वालों ने खूब लूटा और न लूटने वालों ने कुछ नहीं लूटा, वे चूक गये..... !"


मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...