This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Tuesday, August 30, 2016
ऐ
मनुष्यों! मानव देह प्राप्त हुआ है , भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत
गँवाओ, व्यर्थ भाेग विलास में केवल लिप्त रह कर। पतन के लिये ताे अन्य
याेनी है। संसार मे रह कर तुम संसार का उपयाेग कराे दुरुपयाेग नही और संसार
मे अनासक्त हाेकर भगवतप्राप्ति करो , भक्ति कराे भगवान् की क्योंकि मानव
देह का एक मात्र लक्ष्य भगवतप्राप्ति ही है,अन्य कुछ नहीं। नहीं ताे ये
अनमाेल खजाना मानव देह छिन जायेगा और कुकर शुकर की योनि मे भेज देंगें
भगवान।
------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
Sunday, July 24, 2016
अरे
मनुष्यों ! कल से भजूँगा, कल से भजूँगा मत कहो, मत सोचो । क्यों...? अरे!
वह जो तुम्हारी खोपड़ी पर सवार है काल, यमराज । क्या पता कल के पहले ही
टिकट कट जाये रात ही को । ऐसे रोज उदाहरण हमारे विश्व में हो रहे हैं, कि
रात को एक आदमी सोया और सदा को सो गया । न दर्द हुआ, न चिल्लाया, न घर
वालों को मालूम हुआ। घर वाले समझ रहे हैं सो रहा है, आज बड़ी देर तक सोता
रहा, अरे भई जगा दो । जगाने गये तो मालूम हुआ सदा को सो गया, इसका टिकट कट
गया । एक माँ के पेट में ही मर गया,एक पैदा होते ही तुरंत
मर गया,एक 25 साल का I.A.S.करके फ्लाइट से घर आ रहा था,सब घर वाले खुश और
पता चला रास्ते में ही प्लेन क्रैश में मर गया,बाप ले जा रहा है बेटे को
जलाने,पर बाप को होश नहीं है कि मुझको भी जाना है। देख तो रहे हैं हम रोज़
आसपास कि क्या हो रहा है। लेकिन भगवान को याद करने का भजन करने का टाइम
किसी के पास नहीं है। planning बन रही हैं बड़ी-बड़ी,पल का भरोसा नहीं और कोई
पंचवर्षीय योजना कोई दस वर्षीय योजना बना रहा है,अरे! बिगड़ी बना लो जिसके
लिए ये मानव देह भगवान ने तुमको कृपावश दिया है। ये नाती-पोते,ये बेटा-बेटी
कोई तुम्हारे नहीं है जिनमे तुम उलझे हुए हो रात दिन। ये सब तो स्वार्थ
आधारित रिश्ते हैं,कोई किसी का नहीं है यहाँ।
इसलिये कल से भजूँगा यह मत कहो, मत सोचो, तुरंत करो... उधार मत करो । उधार करने की आदत हमारी तमाम जन्मों से है और इसलिये हम अनादिकाल से अब तक चौरासी लाख में घूम रहें है एक कारण। अनंत संत मिले समझाया हम समझे लेकिन उधार कर दिया । करेंगे... करेंगे । तन मन धन ये तीन का उपयोग करना था तीनों के लिये हमने उधार कर दिया । करेंगे, बुढ़ापे में कर लेंगे अभी इतनी जल्दी भी क्या है । मन तो और बिगड़ा हुआ है । धन से तो इतना प्यार है कि कोई भी परमार्थ के काम में खर्च करने में भी बुद्धि लगाते हैं - ''करें, कि न करें? कर दो भगवान के निमित्त । अरे! रहने दो... अरे! नहीं कर दो, अरे! नहीं क्यों निकालो जेब से, अरे! चलो अब कर ही देते हैं । नहीं अब कल करेंगे,'' ये हम लोगों का हाल है सोचियेगा अकेले में । यही सब होता है । तो उधार करना बन्द करना है । मानव देह क्यो मिला है,इसपर विचार करो,संभलों और अपनी बिगड़ी अभी भी बना लो,नहीं तो करोड़ों वर्षों तक यूँ ही 84 लाख में भटकते रहोगे। ये अवसर भी हाथ से चूक जाएगा। संसार में व्यवहार करो,मन भगवान को दे दो। अभी से भजन करो,भक्ति करो,संसार से मन हटाओ,भगवान में लगाओ। उधार करना बंद करो।
इसलिये कल से भजूँगा यह मत कहो, मत सोचो, तुरंत करो... उधार मत करो । उधार करने की आदत हमारी तमाम जन्मों से है और इसलिये हम अनादिकाल से अब तक चौरासी लाख में घूम रहें है एक कारण। अनंत संत मिले समझाया हम समझे लेकिन उधार कर दिया । करेंगे... करेंगे । तन मन धन ये तीन का उपयोग करना था तीनों के लिये हमने उधार कर दिया । करेंगे, बुढ़ापे में कर लेंगे अभी इतनी जल्दी भी क्या है । मन तो और बिगड़ा हुआ है । धन से तो इतना प्यार है कि कोई भी परमार्थ के काम में खर्च करने में भी बुद्धि लगाते हैं - ''करें, कि न करें? कर दो भगवान के निमित्त । अरे! रहने दो... अरे! नहीं कर दो, अरे! नहीं क्यों निकालो जेब से, अरे! चलो अब कर ही देते हैं । नहीं अब कल करेंगे,'' ये हम लोगों का हाल है सोचियेगा अकेले में । यही सब होता है । तो उधार करना बन्द करना है । मानव देह क्यो मिला है,इसपर विचार करो,संभलों और अपनी बिगड़ी अभी भी बना लो,नहीं तो करोड़ों वर्षों तक यूँ ही 84 लाख में भटकते रहोगे। ये अवसर भी हाथ से चूक जाएगा। संसार में व्यवहार करो,मन भगवान को दे दो। अभी से भजन करो,भक्ति करो,संसार से मन हटाओ,भगवान में लगाओ। उधार करना बंद करो।
--------जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






