Tuesday, August 30, 2016

श्री राधे रानी , प्रेम तत्त्व की सार ।
मोहिं 'कृपालु' अब भय काको जब, श्रीराधे रखवार।।

---- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
God is omnipresent and at the same time omniscient. He takes note of your every thought.
ईश्वर सर्वव्यापक है, साथ ही वह सर्वज्ञ और सर्वान्तर्यामी भी है। वह हमारे प्रत्येक संकल्प को नोट करता है।
------JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.
DIVINE WORDS BY- JAGADGURU SHRI KRIPALU JI MAHARAJ.
Every auspicious action should be performed with humility and while constantly remembering that God alone is our all‐in‐all.
समस्त धर्मों का फल 'श्रीकृष्ण' भक्ति है। समस्त साधनाएँ एवं योग्यताएँ श्री कृष्ण भक्ति के बिना व्यर्थ है।
-------श्री महाराजजी।
पिय प्यारी वृषभानुदुलारी, सोइ मम स्वामिनी श्यामा प्यारी।
तुम 'कृपालु ' सरकार हमारी,करहु कृपा अब हमरिहिं बारी।।

------ जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
कोई भगवान का अवतार, कोई महापुरुष ऐसा नहीं हुआ, कि जीव के अंदर बैठकर उसका कल्याण कर दें, सब जीव को स्वयं करना है I
-------श्री महाराजजी।
क्षण क्षण अपना, साधना तथा सेवा में व्यतीत करो । आज का दिन फ़िर मिले ना मिले !! दोबारा मानव देह फिर मिले ना मिले !! इस समय तो मानव देह भी मिला है और गुरु भी मिल गया है ।
फिर लापरवाही क्यों ?
इससे अच्छा अवसर फ़िर आसानी से नहीं मिलने वाला......।
बार - बार सोचो !!!
...................................." तुम्हारा कृपालु "।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...