Tuesday, August 30, 2016

श्री राधे रानी , प्रेम तत्त्व की सार ।
मोहिं 'कृपालु' अब भय काको जब, श्रीराधे रखवार।।

---- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

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