Tuesday, September 13, 2016

सिद्धान्त ज्ञान में theory की नॉलिज (knowledge) में आलस्य न करो। अगर पूरा ज्ञान तुम्हें थ्योरी (theory) का नहीं होगा तो तुम साधना में गिर जाओगे। पूरी नॉलिज (knowledge) चाहिये -----
भगवान् कौन है ?
जीव क्या है ?
माया क्या है ?
संसार क्या है ?
मन क्या है ?
बुद्धि क्या है ?
हर चीज़ आपकी नॉलिज (knowledge) में रहनी चाहिये। तब आपका पतन नहीं होगा। आप चलते जायेंगे सीधे।

..........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

जगद्गुरु वंदना:
हे मंगलमूर्ति ! कृपा सिन्धु गुरुवर ! आपके चरणों का ध्यान, आपके चरित्र का गुणगान जीव को माया मोह जाल से छुड़ाकर शाश्वत सुख प्रदान करता है । आपकी दिव्य वाणी का अनुसरण त्रिगुण, त्रिताप दूर भगा देता है।
जय श्री राधे।

Tuesday, August 30, 2016

हरि गुरु के प्रति अनन्य भक्ति हो और निष्काम हो। उनकी इच्छा में इच्छा रखना ,उनको सुख देना, तन मन धन से सेवा करना,अपना सर्वस्व मानना,निरंतर मानना,यही प्रेम है,शरणागति है।जिसने ये शर्तें पूरी कर दीं वो कृतार्थ हो गया।जिसने नहीं पूरी कीं वो चौरासी लाख योनियों में जैसे कोल्हू का बैल होता है ऐसे घूम रहा है बिचार।
..........जगद्गुरुत्तम श्री कृपालुजी महाप्रभु।
गुरु के आदेशों को सदा साथ रखो,तभी सच्चे साधक कहलाओगे।

.........श्री महाराजजी।
हम पतितों की प्राण हैं राधे, जीवनधन अरमान हैं राधे।
स्वामिनी कर दो दया की दृष्टि, कि दिन रात हम तुमहें ही आराधे ।।
श्री राधे रानी , प्रेम तत्त्व की सार ।
मोहिं 'कृपालु' अब भय काको जब, श्रीराधे रखवार।।

---- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
God is omnipresent and at the same time omniscient. He takes note of your every thought.
ईश्वर सर्वव्यापक है, साथ ही वह सर्वज्ञ और सर्वान्तर्यामी भी है। वह हमारे प्रत्येक संकल्प को नोट करता है।
------JAGADGURU SHRI KRIPALUJI MAHARAJ.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...