This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Sunday, March 5, 2017
कृपा सागर कृपालु........!!!
कृपा सागर कृपालु गुरुदेव तुम्हारी महिमा अपरम्पार है । तुम्हारे ऋण से हम करोड़ों कल्प में भी उऋण नहीं हो सकते । निरन्तर अपराध किये जाने पर भी तुम अपनी असीम करुणा के कारण हम पामर जीवों को गले लगाते हो । तुम्हारे द्वार पर कोई भी आ जाय सदाचारी हो या दुराचारी, तुम्हारा प्रशंसक हो अथवा निन्दक, पापी हो या भक्त, निर्धन हो या धनवान, विद्वान हो या अपढ़ गँवार, तुम उसे अपने प्रेम पाश में बाँधकर उसकी आध्यात्मिक गरीबी दूर करके उसे वह धन प्रदान करते हो कि वह सदा सदा के लिए मालामाल हो जाता है ।
जय श्री राधे।
कृपा सागर कृपालु गुरुदेव तुम्हारी महिमा अपरम्पार है । तुम्हारे ऋण से हम करोड़ों कल्प में भी उऋण नहीं हो सकते । निरन्तर अपराध किये जाने पर भी तुम अपनी असीम करुणा के कारण हम पामर जीवों को गले लगाते हो । तुम्हारे द्वार पर कोई भी आ जाय सदाचारी हो या दुराचारी, तुम्हारा प्रशंसक हो अथवा निन्दक, पापी हो या भक्त, निर्धन हो या धनवान, विद्वान हो या अपढ़ गँवार, तुम उसे अपने प्रेम पाश में बाँधकर उसकी आध्यात्मिक गरीबी दूर करके उसे वह धन प्रदान करते हो कि वह सदा सदा के लिए मालामाल हो जाता है ।
जय श्री राधे।
Wednesday, February 8, 2017
श्री महाराजजी के सभी सत्संगीयो के लिए हमारी प्यारी-प्यारी दीदियों(VSK) का सन्देश:
हमारी प्यारी-प्यारी दीदियों की आज्ञा है की सभी सत्संगी कुसंग से जितना हो सके उतना बचे,अधिक से अधिक संकीर्तन करें,आँसू बहाये,श्री महाराजजी ने हर एक जीव को बेहिसाब प्यार दिया है हम सबको पहचान ही श्री महाराजजी से मिली है,आज श्री महाराजजी अदृश्य जरूर हो गए हैं मगर क्या वो अपने बच्चों से उनके लिए दिन रात आँसू बहाने वालों से क्षण भर के लिए भी दूर रह सकते हैं????.....श्री महाराजजी का प्यार हमे अनंत जन्मों तक भी लगातार मिलता रहे तो भी हम उनकी असल महिमा उनकी करुणा उनके वात्सल्य को नहीं समझ पायेंगे। क्योंकि हमारा अंत:करण ही कीचड़ से भी अधिक मलिन है पर हमारे सिर्फ साधना और सिद्धान्त ही काम आना है इसलिए रोज़ नियमित रूप से श्री महाराजजी की स्पीच सुननी है और रूपध्यान करके आँसू बहाकर साधना करनी है ताकि हमारे प्रभु फिर हमें अपने दर्शन का सौभाग्य प्रदान करें।
राधे-राधे।
हमारी प्यारी-प्यारी दीदियों की आज्ञा है की सभी सत्संगी कुसंग से जितना हो सके उतना बचे,अधिक से अधिक संकीर्तन करें,आँसू बहाये,श्री महाराजजी ने हर एक जीव को बेहिसाब प्यार दिया है हम सबको पहचान ही श्री महाराजजी से मिली है,आज श्री महाराजजी अदृश्य जरूर हो गए हैं मगर क्या वो अपने बच्चों से उनके लिए दिन रात आँसू बहाने वालों से क्षण भर के लिए भी दूर रह सकते हैं????.....श्री महाराजजी का प्यार हमे अनंत जन्मों तक भी लगातार मिलता रहे तो भी हम उनकी असल महिमा उनकी करुणा उनके वात्सल्य को नहीं समझ पायेंगे। क्योंकि हमारा अंत:करण ही कीचड़ से भी अधिक मलिन है पर हमारे सिर्फ साधना और सिद्धान्त ही काम आना है इसलिए रोज़ नियमित रूप से श्री महाराजजी की स्पीच सुननी है और रूपध्यान करके आँसू बहाकर साधना करनी है ताकि हमारे प्रभु फिर हमें अपने दर्शन का सौभाग्य प्रदान करें।
राधे-राधे।
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...






