This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Tuesday, September 5, 2017
रसिक जन – धन गोवर्धन धाम |
त्रिगुणातीत दिव्य अति चिन्मय, ब्रज परिकर विश्राम |
मरकत – मणि – मंडित खंडित मद, गिरि सुमेरु अभिराम |
राधाकुंड कुसुम सर आदिक, लीलाधाम ललाम |
मर्दन – मघवा – मद मनमोहन, पूजित पूरनकाम |
सखन सनातन संग श्याम जहँ, विहरत आठों याम |
कब ‘कृपालु’ हौंहूँ बड़भागी, ह्वैहौं बसी अस ठाम ||
त्रिगुणातीत दिव्य अति चिन्मय, ब्रज परिकर विश्राम |
मरकत – मणि – मंडित खंडित मद, गिरि सुमेरु अभिराम |
राधाकुंड कुसुम सर आदिक, लीलाधाम ललाम |
मर्दन – मघवा – मद मनमोहन, पूजित पूरनकाम |
सखन सनातन संग श्याम जहँ, विहरत आठों याम |
कब ‘कृपालु’ हौंहूँ बड़भागी, ह्वैहौं बसी अस ठाम ||
भावार्थ – रसिक जनों का सर्वस्व श्री गोवर्धन धाम है जो गुणों से अतीत
है एवं दिव्यातिदिव्य चिन्मय तथा ब्रज के निवासियों का विश्राम स्थल है |
वह गोवर्धन धाम मरकत मणियों से सुशोभित तथा सुमेरु गिरि ( पर्वत ) के भी मद
को मर्दन करने वाला है | वहाँ राधाकुंड, कुसुम सरोवर आदि अनेक मनोहर लीला
स्थलियाँ हैं, जो इन्द्र के अभिमान को चूर्ण करने वाला ब्रह्म श्रीकृष्ण से
भी पूज्य और कामनाओं से परे हैं | इस गोवर्धन धाम में सनातन गोलोक के
श्रीदामा आदि सखाओं के साथ, श्रीकृष्ण सदा ही विविध प्रकार के खेल खेला
करते हैं | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि ऐसे दिव्य गोवर्धन धाम में बस कर
हम कब परम भाग्यशाली बनेंगे ?
( प्रेम रस मदिरा धाम – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
( प्रेम रस मदिरा धाम – माधुरी )
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित - राधा गोविन्द समिति
हम
लोग छोटी सी चीज को पाने के लिये पहले सोचा,फिर प्लानिंग किया,फिर
प्रैक्टिस किया,फिर भी वो काम पूरा हो न हो,डाउट है।अरे देखो चित्रकेतु के
एक करोड़ स्त्रियाँ और बच्चा नहीं हुआ। तो एक स्त्री से कोई चैलेन्ज करे कि
बच्चा होगा। अरे एक स्त्री से क्या चैलेन्ज कर रहे हो ? सतयुग के हैं
चित्रकेतु। लेकिन भगवान् के एरिया में ये बात नहीं। भगवान् ने सोचा कि ये
संसार बन गया और उन्होंने ऐसी शक्ति हमको दी है अपने आपसे मिलने के लिये कि
बच्चों ! तुम भी सोचो, हम मिल जायेंगे। ऐं सोचने से मिल जाओगे ? हाँ।
मामनुस्मरतश्र्चित्तं मय्येव प्रविलीयते।
( भाग.११-१४-२७ )
केवल सोचो मन से कि वो मेरे हैं,वो मेरे हैं,वो मेरे हैं,वो मेरे अन्दर में हैं,सर्वव्यापक भी हैं,वे गोलोक में भी हैं। ये फेथ(Faith),विश्वास,इसका रिवीजन(Revision)।इसी का नाम साधना। बस सोचो।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
मामनुस्मरतश्र्चित्तं मय्येव प्रविलीयते।
( भाग.११-१४-२७ )
केवल सोचो मन से कि वो मेरे हैं,वो मेरे हैं,वो मेरे हैं,वो मेरे अन्दर में हैं,सर्वव्यापक भी हैं,वे गोलोक में भी हैं। ये फेथ(Faith),विश्वास,इसका रिवीजन(Revision)।इसी का नाम साधना। बस सोचो।
----- जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।
Saturday, August 19, 2017
मन,
भगवान् में लगाना है । मन गन्दा है और इसके विचार अनन्त जन्म में
बिगडते-बिगडते स्वाभाविक गन्दे हो गये हैं, अतः मन को शुद्ध करना है । मन
से ही अच्छे-बुरे विचार उत्पन्न होते हैं, यदि मन ने अपनी स्थिति ठीक कर
ली, तो सब ठीक हो जायेगा॥
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
------सुश्री श्रीधरी दीदी (प्रचारिका), जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाप्रभु।
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