Saturday, June 1, 2019

संसार में व्यवहार कुशल बनो परिवार वालों से अच्छा व्यवहार करो अपनी duty अच्छे से निभाओ। लेकिन मन का प्यार भगवान से करो। ये जाने रहो कि एक दिन संसार की सभी रिश्ते और वस्तुएं खत्म हो जाएगी ।

Monday, May 20, 2019

श्यामा ही हैं श्याम अरु श्याम ही हैं श्यामा, श्यामा श्याम विहरत वृन्दावन धामा।
श्याम तनु नीलो रंग, पीलो रंग श्यामा, श्याम धारें पीलो पट, नीलो पट श्यामा।
श्यामा रँगी श्याम रँग, श्याम रँगे श्यामा,ब्रजरस बरसावत ब्रज धामा।
श्यामा पावें श्याम रस, श्याम पावें श्यामा,हौं 'कृपालु' पावूं रस श्याम अरु श्यामा।।
----- जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।
संसार में प्रथम तो वैराग्य होना कठिन है। यदि वैराग्य हो भी गया तो कर्मकाण्ड का छूटना कठिन है। यदि कर्मकाण्ड से छुटकारा मिल गया तो काम क्रोधादि से छूटकर दैवी सम्पत्ति प्राप्त करना कठिन है। यदि दैवी संपत्ति भी आ गई तो भी सदगुरु मिलना कठिन है। यदि सदगुरु भी मिल जाय तो भी उनके वाक्य में श्रद्धा होकर ज्ञान होना कठिन है। और यदि ज्ञान भी हो जाय तो भी चित्त- वृत्ति का स्थिर रहना कठिन है।
यह स्थिति तो केवल भगवत्कृपा से ही होती है, इसका कोई अन्य साधन नहीं है। गोस्वामी तुलसीदास जी भी कहते हैं :--
" यह गुन साधन तें नहिं होई।
तुम्हरी कृपा पाव कोई कोई।।"
अतः विषयों से मन को हटाकर भगवत्तत्व गुरु से पूर्ण श्रद्धा के साथ समझकर उनके बताये गए मार्ग का ही अनुसरण करना चाहिए। तभी हमारा कल्याण होगा।
जो मनुष्य संसार को नाशवान और हरि- गुरु को सदा का साथी समझकर चलता है, वही उत्तम गति पाता है।
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प्रिय मित्रों...जय श्री राधे!
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राधे-राधे।
निवेदक:
आपका नगण्य भाई:
शरद गुप्ता।
'स्मरण',एक मिनट तो क्या एक क्षण से शुरू होता है, इसे बढ़ाना ही साधना है। इस एक क्षण के 'स्मरण' को 'मरण' तक बढ़ाते रहना है। यह एक 'क्षण का स्मरण' जब 'एक क्षण को भी विस्मृत न हो' ,यही लक्ष्य की सिद्धि है।
मानव होकर के हम निराशा का चिन्तन करें,इससे बड़ा कोई अपराध नहीं है,अविवेक नहीं है। जो प्राप्त वस्तु है उसका अनादर करने से निराशा आती है।
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज
नास्तिक व्यक्ति का संग रूपी कुसंग सबसे बड़ा अवगुण है। भक्ति मार्ग के साधक को हरि विमुखों का संग त्याग करना परमावश्यक है।

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...