This Blog is dedicated to the Lotus Feet of my Spiritual Master - Jagadguru Shri Kripaluji Maharaj, who is the Descension of the Bliss of Divine Love, who is illuminating the entire world with light of His Vedic and Yogic knowledge of our Scriptures. Jai Shree Radhey!!!
Sunday, August 28, 2011
THERE ARE ONLY TWO AREAS IN THE WORLD.ONE IS DIVINE,SATYA AND THE OTHER IS MATERIAL,ASATYA. GOD AND HIS SAINTS WHO ARE BEYOND MAYA ALONE ARE 'SATYA'.ASSOCIATION WITH THEM THROUGH THE COMPLETE INVOLVEMENT OF THE MIND AND INTELLECT IS REFERRED TO AS 'SATSANGA', 'DIVINE ASSOCIATION'.ANYTHING OR ANYONE ELSE APART FROM THIS NATURALLY COMES UNDER THE THREE MODES OF MAYA-'TAMASA','RAJASA' AND 'SATTVA'.TH...EREFORE,ASSOCIATION WITH THIS AREA IS REFERRED TO AS 'KUSANGA','MATERIAL ASSOCIATION'.IN SHORT,WHATEVER LEADS TO THE ATTACHMENT OF THE MIND AND INTELLECT TO THE DIVINE IS "SATSANGA",APART FROM THIS,EVERYTHING ELSE IS "KUSANGA" OR 'WRONG ASSOCIATION'.
........JAGADGURU SHREE KRIPALUJI MAHAPRABHU.
------FROM THE BOOK:PREM RAS SIDDHANTHA(PHILOSOPHY OF DIVINE LOVE).COPYRIGHT@2009.
JAGADGURU KRIPALU PARISHAT.ALL RIGHTS RESERVED.
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------FROM THE BOOK:PREM RAS SIDDHANTHA(PHILOSOPHY OF DIVINE LOVE).COPYRIGHT@2009.
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चलो मन ! श्री वृंदावन धाम |
जहँ विहरत नागरि अरु नागर, कुँ जनि आठों याम |
भूख लगे तो रसिकन जूठनि, खाइ लहिय विश्राम |
प्यास लगे तो तरणि-तनूजा, तट पिवु सलिल ललाम |
नींद लगे तो जाइ सोइ रहु, लतन-कुंज अभिराम |
...ब्रज की रेनु रेनु लखि चिन्मय, तन्मय रहु अविराम |
पै ‘कृपालु’ मन ! जनि यह भूलिय, भाव रहे निष्काम ||
भावार्थ- हे मन ! तू दिव्य चिन्मय वृन्दावन-धाम में चल, जहाँ लाड़िली और लाल विविध कुंजों में आठों याम विहार किया करते हैं | यदि तुझे भूख लगे तो महापुरुषों की जूठन खाकर सुखी होना | जब प्यास लगे, यमुना का निर्मल जल पी लिया करना | जब सोने की इच्छा हो तब स्वाभाविक बने हुए लताओं के कुंज घरों में सो जाया करना | अरे मन ! ब्रज के प्रत्येक कण-कण में चिन्मय-स्वरूप देखते हुए सदा ही तन्मय रहा करना | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि हे मन ! किन्तु यह न भूलना कि इन सब में तेरा भाव निष्काम रहे |
(प्रेम रस मदिरा धाम-माधुरी)
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
सर्वाधिकार सुरक्षित- राधा गोविन्द समिति
जहँ विहरत नागरि अरु नागर, कुँ जनि आठों याम |
भूख लगे तो रसिकन जूठनि, खाइ लहिय विश्राम |
प्यास लगे तो तरणि-तनूजा, तट पिवु सलिल ललाम |
नींद लगे तो जाइ सोइ रहु, लतन-कुंज अभिराम |
...ब्रज की रेनु रेनु लखि चिन्मय, तन्मय रहु अविराम |
पै ‘कृपालु’ मन ! जनि यह भूलिय, भाव रहे निष्काम ||
भावार्थ- हे मन ! तू दिव्य चिन्मय वृन्दावन-धाम में चल, जहाँ लाड़िली और लाल विविध कुंजों में आठों याम विहार किया करते हैं | यदि तुझे भूख लगे तो महापुरुषों की जूठन खाकर सुखी होना | जब प्यास लगे, यमुना का निर्मल जल पी लिया करना | जब सोने की इच्छा हो तब स्वाभाविक बने हुए लताओं के कुंज घरों में सो जाया करना | अरे मन ! ब्रज के प्रत्येक कण-कण में चिन्मय-स्वरूप देखते हुए सदा ही तन्मय रहा करना | ‘श्री कृपालु जी’ कहते हैं कि हे मन ! किन्तु यह न भूलना कि इन सब में तेरा भाव निष्काम रहे |
(प्रेम रस मदिरा धाम-माधुरी)
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
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मन का अटैचमेंट किसमें करें?
एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...
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Baar Baar suno, Baar Baar suno, tab tatvagyan paripakva hoga. Ye jo hum Logo ko Brham hota hai ki yeh to maine bahut suna hai, yeh to mein j...
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गुरु में हरिबुद्धि रखो सदा गुरुधामा | नरबुद्धि आने नहिं पाये आठु यामा || गुरु के प्रति सदैव भगवद् बुद्धि ही रखो | निरन्तर यह सावधानी र...
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ए # मनुष्यों ! # मानव_देह प्राप्त हुआ है , # भगवतप्राप्ति के लिये केवल, इसकाे मत गँवाओ, व्यर्थ # भाेग_विलास में केवल लिप्त रह कर...






