Thursday, August 15, 2019

Wishing a very-very Happy 73rd Independence Day to All Dear Friends Across The Globe.
Jai Hind...Bharat Mata ki Jai ho.
Jagadguru Shri kripalu ji Maharaj ki jai.
Jai-Jai Shri Radhey.
सभी मित्रों को 73 वें स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।
हम उस महानतम देश के वासी हैं जिस देश में विश्व की महानतम विभूति 'जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज' (श्री महाराजजी) की अविरल भक्तिधारा बहती है.......।।।
जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की जय.......!!!
भारत माता की जय हो.......!! जय हिन्द....!!
राधे -राधे।

Monday, July 29, 2019

अगर इस मानव देह का सदुपयोग न किया ईश्वर की ओर डायवर्ट नहीं किया तो फिर संसार की ओर भागेगा। और उसी तेज गति से भागेगा। तो फिर क्या परिणाम होगा ? फिर वही चौरासी लाख का चक्कर मिलेगा। खाली मानव देह पाने से काम नहीं बन सकता।
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज
साधना करु साधना करु साधना करु प्यारे।
साधना ते ही मिले तोहिं, साध्य हरि रति प्यारे ।
प्रथम श्रद्धा युक्त हो जा, शरण गुरु पद प्यारे।
गुरु की बुधि में जोड़ निज बुधि, है शरण यह प्यारे।
ग्रन्थ पढु जनि बहुत सुनु जनि,संत मत बहु प्यारे।
ब्रह्म माया जीव का करु, ज्ञान गुरु सों प्यारे।
सेव्य सों सम्बन्ध अपनो, जानु गुरु सों प्यारे।
हरि में गुरु में भेद जनि, लवलेश मानहु प्यारे।
अनहोनी होती नहीं, तू क्यों हुआ उदास ।
होनी भी टल जायेगी, रख गुरु में विश्वास ।।
जितने आये कष्ट सब, कर लेना मंजूर।
लेकिन गुरु के द्वार से, कभी न होना दूर ।।
अपने गुरु को छोड़कर, करे किसी की आस ।
निश्चित ही वह शिष्य फिर, करे नरक में वास ।।
बिना गुरु के तर सका, हुआ न कोई शूर।
फैल रहा चारों तरफ, मेरे सदगुरु का नूर ।।
गुरु चरणों में शिष्य के, दुःख कट जाते आप ।
पास न उसके आ सके, जग के तीनों ताप ।।
अपने गुरु से प्रीत जो, करता है निष्काम।
गुरु चरणों में ही बसे, उसके चारों धाम ।।
जितने भी तू कष्ट दे, सब मुझको स्वीकार।
लेकिन गुरु-सेवा विमुख, मत करना करतार ।।
कठिन परीक्षा में कभी, मत छोड़ो विश्वास।
खोट काटने शिष्य का, देते हैं सतगुरु त्रास ।।
श्री सदगुरुदेव भगवान की जय !!!
जगदगुरूत्तम श्री कृपालु जी महाप्रभु की जय।
हमारे परमपूजनीय श्री महाराजजी (जगद्गुरुत्तम भगवान श्री कृपालुजी महाराज) तो कृपा की मूर्ति ही हैं। यानि अंदर बाहर सर्वत्र कृपा ही कृपा है। यही उनका वास्तविक स्वरूप है। 'कृपालु' का अर्थ ही है कृपा लूटाने वाला। कोई दुर्भावना से आए सदभावना से उनके पास आये वे सब पर कृपा ही करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि गुरुवर का तन मन सब कृपा का ही बना हुआ है। सोते जागते उठते बैठते उनका एक ही काम है जीवों पर कृपा करना। उनका तन,मन सब कृपा ही कृपा का बना हुआ है, वे बिना कृपा किये रह ही नहीं सकते। लेकिन हम जिस दिन उन्हें सेंट-परसेंट 'कृपालु' मान लेंगे बस हमारा काम बन जायेगा।
कोई भी चीज़ होगी वह विश्वास पर निर्भर करती है। आपको विश्वास जितनी मात्रा में हो गया बस उतनी मात्रा में आप का काम बन गया। और विश्वास करना ये आपके हाथ में है। ये तो सन्त और भगवान् नहीं करा सकते।
#जगद्गुरु_श्री_कृपालु_जी_महाराज

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...