Wednesday, September 14, 2011

‎'कृपालु' के साथ दो चाल नहीं चलेंगी, कि मुझको भी हृदय में रखों और गलतियाँ(नामापराध) भी करते जाओ। मुझे अपने हृदय से निकाल दो तब गलतियाँ करो।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...