Thursday, April 11, 2013

करू मन छिन - छिन , हरि - गुरु सुमिरन ।
जाने कब जाय छिन , सुर दुर्लभ तन ।।
------श्री महाराज जी।
करू मन छिन - छिन , हरि - गुरु सुमिरन । 
जाने कब जाय छिन , सुर दुर्लभ तन ।।
---श्री महाराज जी।

 

No comments:

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...