Tuesday, March 10, 2015

हमलोग संसार में सुख ढूँढते हैं जगह-जगह और कहीं पर सुख है ही नहीं तो मिलेगा कहाँ से,आनंद को छिपा लिया है भगवान ने इस संसार में रखा ही नहीं है।
........श्री कृपालु महाप्रभु।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...