Thursday, July 16, 2015

अनंत जन्मों से हम गंदगी खा रहे हैं ,विष पीने का इतना अधिक अभ्यास पड़ गया है कि अमृत पीना अच्छा नहीं लगता।
..........श्री महाराजजी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...