Thursday, July 2, 2015

दो बातों को बहुत सावधानी से सदा और एक साथ ध्यान में रखना है कि भगवान का सदा सर्वत्र स्मरण हो और एक क्षण का उधार न हो। अगला क्षण मिले न मिले। अगर हम मानव देह की क्षणभंगुरता पर सदा ध्यान केन्द्रित रखें तो लापरवाही नहीं करेंगे। सावधान रहेंगे।
......श्री महाराजजी।

No comments:

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...