Monday, May 20, 2019

कलियुग में भगवन्नाम, गुण लीलादि संकीर्तन ही भगवत्प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है । भुक्ति,मुक्ति की कामनाओँ से रहित हो कर हरि-गुरु का रूपध्यान करते हुए,उनसे अत्यन्त दीनतापुर्वक,रोकर,दिव्य प्रेम की याचना करने से ही अन्तःकरण शुद्ध होगा । तब गुरु कृपा से दिव्य प्रेम की प्राप्ति होगी जिससे श्री राधाकृष्ण की नित्य सेवा का अधिकारी बन कर जीव सदा-सदा केलिये कृतार्थ हो जाएगा।
हरेर्नामैव नामैव नामैव मम जीवनम्।
कलौ नास्तैव नास्तैव नास्तैव गतिरन्यथा ॥

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

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