Thursday, January 10, 2013

लोगों को दूसरों की तो बड़ी भारी फिक्र है, परन्तु हमारा स्वयं का क्या होगा ,इसकी फिक्र नहीं है। आश्चर्य: अपनी फिक्र क्यो नहीं करते हो।
-----श्री कृपालुजी महाराज.

Wednesday, January 9, 2013




साधक का प्रश्न: महाराजजी हम आपको भगवान मानते हैं! ?

श्री महाराजजी द्वारा उत्तर: अरे! तुम पत्थर को भगवान मान लो उससे ही भगवतप्राप्ति हो जायेगी। काहे को परेशान हो रहे हो। सालिग्राम कैसे होते हैं? काला पत्थर होता है। अत: अंत:करण शुद्धि करो बस उसके बाद सब अपने आप ठीक हो जायेगा।

त्रिभुवन में सत केवल हरि व हरिभक्त ही हैं, शेष असत हैं।

------श्री महाराजजी।

*राधे राधे*
ऐसा करके दिखा दो कि एक भी शिकायत न मिलें!उससे खुशी के मारे हमारा एक किलो खून बढ़ जायेगा!नुकसान तुम लोगो का होता है और ममता से दुःख हमें होता है!इतनी सारी भग्वत्कृपाये तुम लोगों पर हैं!अब और क्या कृपा चाहते हो?
*****  श्री कृपालु जी महाराज *****



It is Thakurji's (Shree Krishna's) weakness that the moment He hears someone singing Kishoriji's (Radharani's) name, He runs towards the one singing Her names! To please and make Shree Krishna happy, just chant the Divine name and glories of Radharani. This is the fastest method of pleasing your beloved Shree Krishna.

प्रथमं सद्गुरुं वन्दे , श्रीकृष्णम तदनंतरम ।
गुरु: पापात्मनाम त्राता , श्रीकृष्णस्त्वम़लात्मनाम ॥

Let us adore our Gurudev first then Lord Krishna. Because, Guru delivers the fallen souls like us while Lord Krishna delivers the pure ones only.

~जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज की जय~

Tuesday, January 8, 2013





"हमारे श्री महाराजजी कलिमल ग्रसित अधम जीवों को भी सचमुच बरबस ब्रजरस में सराबोर करना चाहते हैं। उनके श्रीमुख से नि:सृत संकीर्तन ब्रज रस ही है, पीने वाला होना चाहिये। श्री महाराजजी की रचनाओं में निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है, फिर भी हम जैसे पतित जीव भी इतना तो महसूस करते ही हैं कि ऐसा रस कभी नहीं मिला।

****बोलिये रसिक-शिरोमणि भगवान श्री कृपालुजी महाराज की जय.........................."

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...