Monday, June 9, 2014

तुझे पाने की आरज़ू और तुझसे मिलने की जुस्तज़ू ............!
जिन्दगी इन दो ख्वाबों से शुरू और इन दो अरमानों पर खत्म............!!
राधे-राधे।

राधे-राधे बोल नित,करु राधे को ध्यान।
ऐहैं निज गोलोक तजि,भाजत श्याम सुजान।।

निरंतर श्री राधिका का ध्यान करते हुए उनका नामादि संकीर्तन करो। इसी साधना से श्यामसुंदर बिना बुलाये भागे भागे अपना लोक छोड़कर आ जायेंगे। राधे नाम से श्यामसुंदर को इतना अनुराग है।
Constantly meditate on Shri Radha while chanting her name and glories.With this very spiritual practice,Lord Krishna will come running to you leaving his divine abode Goloka.Shyamsundar loves the name of Radha so much.
'भक्ति शतक' दोहा संख्या ८०.........जगद्गुरु श्री कृपालुजी महाराज।

जो ममता सांसारिक जगत में दूषण है वह ईश्वरीय जगत में भूषण है। संसार में वह बंधनकारी है तो वहां वह भगवत्प्राप्ति करने वाली।
............श्री महाराज जी।

तुम अपने करम उँगलियों पर गिनते हो........!
और ज़ुल्मों की तुम्हारे इन्तेहा नहीं........!!
राधे-राधे।

हे ! करुणा सागर, दीन बंधु, पतितपावन, तुम्हारी कृपा के बिना कोई तुम्हारी सेवा भी तो नहीं कर सकता । हमारी गति, मति, रति सर्वस्व तुम्ही हो । अकिंचन के धन, निर्बल के बल, अशरण-शरण, कहाँ से लाएँ तुम्हें प्रसन्न करने के लिए सतत रुदन और करुण क्रंदन । अनंत जन्मो का विषयानंदी मन संसार के लिए आँसू बहाना चाहता है श्याम मिलन के लिए नहीं । अकारण-करुण कुछ ऐसी कृपा कर दो की मन निरन्तर युगल चरणों का स्मरण करते हुए ब्रजरस धन का लोभी बन जाये । रोम रोम प्रियतम के दर्शन के लिए, स्पर्श के लिए, मधुर मिलन के लिए, इतना व्याकुल हो जाए की आंसुओं की झड़ी लग जाए ओर हम आँसुओ की माला पहनकर तुम्हें प्रसन्न कर सकें पश्चात निशिदिन श्यामा श्याम मिलन हित आँसू बहाते रहें । अपने अकारण करुण विरद की रक्षा करते हुए हे ! कृपालु, हे ! दयालु हमारा सर्वस्व बरबस लेकर ब्रजरस प्रदान करो । किसी भी प्रकार यह स्वप्न साकार करो की हम तुम्हारे वास्तविक गौर-श्याम मिलित स्वरूप को हृदय मे सदा सदा के लिए धारण करके प्रेम रस सागर मे निमग्न हो अश्रु पूरित नेत्रों से तुम्हारी विरुदावली का अनंत काल तक गान करते रहें ।
-----जगद्गुरुत्तम भक्तियोगरसावतार कृपालु महाप्रभु ।

Sunday, June 8, 2014

जितने समीप आग के कोई जायेगा उतना ही उसका शीत उसकी ठंडक कम हो जायेगी , उतना ही उसका ताप बढ़ता जायेगा। उसी प्रकार हम जितना जितना भगवान् के पास भक्ति के द्वारा जायेंगे , उतनी ही भगवत्शक्ति हमको मिलती जायेगी और चूँकि भगवान् नित्य शांत , नित्य आनंदमय है इसलिए उसकी शक्ति से हम भी शांत होते जायेंगे। इस प्रकार से यदि सभी जीव शांति की तरफ अग्रसर होंगे तो हमारा हिन्दू धर्म कहता है कि एक - एक मिलकर ही समूह बनता है तो विश्व में शांति हो सकती है।
............ जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाप्रभु।

Shri Radha, the bliss-imparting power (hladini shakti) of Shri Krishna, teaches the lesson of divine love. No one loves or pleases Krishna like She does. Supremely selfless in Her devotion to Him, She gives no thought to Her own happiness, but only to His. To serve Him is the aim of Her existence and to please Him, Her joy.
.......SHRI MAHARAJ JI.

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...