Tuesday, June 25, 2013

जिस प्रेम के द्वारा संसार की कामना नहीं कर रहा है किन्तु उससे मुक्ति की कामना कर सकता है। मुक्ति से भी ईश्वर की प्राप्ति होती है - एकत्व मुक्ति की। लेकिन उससे भी ऊँची स्थिति है मुक्ति की भी कामना न करके भगवान् का निष्काम प्रेम चाहना।
..........जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...