Wednesday, September 17, 2014

हे श्रीकृष्ण ! यदि दीनता से ही तुम कृपा करते हो तो वह तो मेरे पास थोड़ा भी नहीं है । अतः पहले ऐसी कृपा करो कि दीन भाव युक्त बनूँ ।' ऐसा कह कर आँसू बहाओ । यह करना पड़ेगा । मानवदेह क्षणिक है । जल्दी करो । पता नहीं कब टिकिट कट जाय ।
यह मेरा नम्र निवेदन सभी से है ।
--------जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज।

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