Sunday, April 20, 2014

कुसंग के गलत वातावरण में रहते हुए भी जो सत्संग में निरंतर बढ़ता जाये,वही असली साधक है।
...........श्री महाराज जी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...