Sunday, August 11, 2013

यह मन अनादि काल से माया के आधीन है ! अतः अत्यंत मलिन हो गया है ! अतः श्याम प्रेम के अश्रुजल से धोकर इसे निर्मल बना दो !
:::::::::::जगद्गुरुत्तम श्री कृपालु महाप्रभु::::::::::::

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...