Sunday, August 11, 2013

श्री कृष्ण एवं आनंद दोनों पर्यायवाची शब्द हैं। विश्व का प्रत्येक व्यक्ति एकमात्र आनंद ही चाहता है। अतः वह आनंद का दास है अतः वह श्री कृष्ण का भी अनजाने में दास ही है।
.......श्री कृपालु महाप्रभु जी।

No comments:

मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...