Wednesday, July 2, 2014

वे कृपा करके नहीं थकते,और कृपा न करे ऐसा भी नहीं हो सकता,इससे बढ़कर और वो कर भी क्या सकते हैं?अत: पात्र तो हमें ही बनाना पड़ेगा।
.......श्री महाराज जी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

एक तमोगुणी, एक रजोगुणी, एक सत्त्वगुणी, एक गुणातीत । ये चार पर्सनैलिटी, चार कक्षाएँ हैं। अगर हमने अपने मन का अटैचमेन्ट तामसी व्यक्ति या तामसी...