Saturday, July 19, 2014

साधक ने अपनी बुद्धि को जब महापुरुष एवं भगवान् के ही हाथ बेचा है , तब उसे अपनी बुद्धि को महापुरुष के आदेश से ही सम्बद्ध रखना चाहिये। लोक में भी देखो , एक कूपमण्डूक अत्यन्त मूर्ख ग्रामीण भी , अपने मुकदमे में किसी व्युत्पन्न वकील के द्वारा प्रमुख कानूनी विषयों को अपनी बुद्धि में रखकर धुरन्धर वकील की जिरह में भी नहीं उखड़ता।
****** श्री महाराज जी।

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मन का अटैचमेंट किसमें करें?

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